चुपके-चुपके जो कोई ईश्वर से दुआ करता है

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चुपके-चुपके जो कोई ईश्वर से दुआ करता है

ओ३म्
ओ३म्
ओ३म् भूर्भुव॒: स्व॒: तत्स॑वि॒तुर्वरे॑ण्यं॒
भर्गो॑ दे॒वस्य॑ धीमहि ।
धियो॒ यो न॑: प्रचो॒दया॑त्

यजुर्वेद 36/3

ओ३म् यस्य भूमिः प्रमान्तरिक्षमुतोदरम् ।
दिवं यश्चक्रे मूर्धानं तस्मै ज्येष्ठाय ब्रह्मणे नमः ॥

अथर्ववेद 10/7/32

चुपके-चुपके जो कोई, ईश्वर से दुआ करता है
उसकी यकीनन वो पिता, सुना करता है
उसके डर से मायूस मत होना कभी
तू तो इन्सान है, वो चींटी की सुना करता है
दुआ मञ्जूर होती है, यदि वो दिल से होती है
मगर मुश्किल तो ये है कि वो बड़ी मुश्किल से होती है

मिलने की आरजू है, तो खुद को मिटा के देख
पर्दानशीं गर है तो पर्दे में आकर देख
फिर कौन कहता है कि मुलाकात नहीं होती
हर रोज मिलते हैं मगर, प्रभु से बात नहीं होती

ले चल तू उस ओर, रे साथी !!!
ले चल तू उस ओर, रे मनवा !!!
ले चल तू उस ओर, रे साथी !!!

मार रहा होऽऽऽऽ प्रभु मिलन का
सागर मस्त हिलोर
ले चल तू उस ओर, रे मनवा !!!
ले चल तू उस ओर

दो हृदयों का मधुर मिलन हो
जहाँ शान्ति के खिले सुमन हों
दो बिछुड़ों का मधुर मिलन हो
जहाँ शान्ति के खिले सुमन हों
जहाँ न होता विरह व्यथा से
व्याकुल हृदय चकोर
रे मनवा !!!
ले चल तू उस ओर, रे माँझी !!!
ले चल तू उस ओर
ले चल तू उस ओर, रे मनवा !!!

जहाँ वैर का नाम नहीं हो
छ्ल प्रपञ्च का काम नहीं हो
जहाँ न करता हो कोमल मन
तो ये कुटिल कठोर
रे मनवा !!!
ले चल तू उस ओर
ले चल तू उस ओर, रे मनवा !!!
ले चल तू उस ओर

मार रहा होऽऽऽऽ प्रभु मिलन का
सागर मस्त हिलोरे
मार रहा होऽऽऽऽ ईश मिलन का
सागर मस्त हिलोरे
ले चल तू उस ओर, रे मनवा !!!
ले चल तू उस ओर

आज जगत् में प्यार नहीं है
शुद्ध सच्चा व्यवहार नहीं है
बिछे हुए जीवन पथ पर
पग-पग संकट घोर
रे मनवा !!!
ले चल तू उस ओर, रे साथी !!!
ले चल तू उस ओर

जब तू है मेरा चिर-सङ्गी
तो मुझको किस बात की तङ्गी
वो बादल बन-बन बरसेगा
नाचेगा मन मोर
रे मनवा !!!
ले चल तू उस ओर, रे मनवा !!!
ले चल तू उस ओर
ले चल तू उस ओर, रे साथी !!!
ले चल तू उस ओर

मार रहा होऽऽऽऽ प्रभु मिलन का
सागर मस्त हिलोरे
ले चल तू उस ओर, रे मनवा !!!
ले चल तू उस ओर
ले चल तू उस ओर, रे साथी !!!
ले चल तू उस ओर

स्वर : सुश्री प्रियन्का आर्या, कन्या गुरुकुल भुसावर, भरतपुर, राजस्थान