चेतना है जग में तो चेतना जगाओ आप।
चेतना है जग में तो,
चेतना जगाओ आप।
चेतना के बिना साथ,
देता कौन जग में।
ध्रुव जैसा सत्य है,
असत्य ना समझ मीत ।
क्रान्ति का पथ त्याग,
चेता कौन यहाँ जग में ।।१।।
जल करके दीप देता,
औरों को प्रकाश सदा।
बुझने वालों का नाम,
लेता कौन जग में ।। २ ।।
आर्यवीर नौजवानों तेज
को सम्भालो उठो ।
भीष्म कहे आप सा
विजेता कौन जग में ।।३ ।।










