चेतन, चेत प्रभु चिन्तन में श्रद्धा पूरित हो
चेतन, चेत प्रभु चिन्तन
में श्रद्धा पूरित हो,
कर धारण सात्विकता
जीवन में ।। चेतन० ।।
दिव्य उषा की उदित हुई है,
किरणें तव प्रांगण में।
तू पगले, अब तक भी सोया,
उठ लग ईश-भजन में।। चेतन० ।।
भौतिकता में भटक रहा क्यों?
शांति नहीं है धन में।
ज्ञान के चक्षु खोल दे साधक,
शांति मिलेगी मन में।।
यम नियमों का पालन करके,
सिद्धि पा आसन में। चेतन० ।।
प्राणायामाभ्यासी बन,
लग योग-क्रिया साधन में।। चेतन० ।।
योग क्रिया से देती दिखाई,
आभा आत्म-गगन में।
दिव्यलोक प्रकाशित होगा,
निर्मल पावन मन में।। चेतन० ।।
विश्वानि दुरितानि परासुव
मंत्र सदा जप मन में।
अग्ने नय सुपथा जो गाये,
आये न भव-बंधन में।। चेतन० ।।
सच्चा मानव पाल वही
जो रहता मग्न मनन में।
सुरभित सुमन खिलेंगे उसके,
जीवन के कानन में।। चेतन० ।।










