आर्य समाज आर्यपुरा बुलन्दशहर का 48वां आर्य महासम्मेलन एवं आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर 2026
आर्य समाज आर्यपुरा, जिला बुलन्दशहर द्वारा स्थापना दिवस के पावन अवसर पर 48वां आर्य महासम्मेलन एवं आत्मरक्षा व चरित्र निर्माण प्रशिक्षण शिविर का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह चार दिवसीय वैदिक आयोजन 02 मई से 05 मई 2026 तक आर्य समाज मंदिर, आर्यपुरा (पो. बिरौरा, बुलन्दशहर) में संपन्न होगा।
इस महोत्सव में वैदिक यज्ञ, प्रवचन, भजन, सामाजिक जागरण कार्यक्रम, महिला सम्मेलन तथा युवा सशक्तिकरण जैसे अनेक प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। एमडीएच परिवार के सहयोग एवं प्रतिष्ठित अतिथियों की उपस्थिति इस आयोजन को विशेष बनाएगी।
कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएं
इस आयोजन का शुभारंभ 2 मई को उद्घाटन सत्र और 21 कुंडीय महायज्ञ से होगा, जिसमें आचार्य एवं विद्वान वैदिक मंत्रों का उच्चारण करेंगे। इसके साथ ही ध्वजारोहण एवं भव्य शोभायात्रा (जुलूस) निकाली जाएगी, जो विभिन्न ग्रामों से होकर पुनः आर्य समाज मंदिर में समाप्त होगी।
प्रत्येक दिन अलग-अलग विषयों पर वैदिक प्रवचन एवं संगोष्ठियां आयोजित होंगी, जैसे:
- महर्षि दयानंद का विश्व में योगदान
- स्वतंत्रता संग्राम में आर्य समाज की भूमिका
- समाज में बढ़ता पाखंड और उसका उन्मूलन
- वैदिक वर्ण एवं आश्रम व्यवस्था
- मानव जीवन में षोडश संस्कार का महत्व
महिला एवं युवा सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान
4 मई को आयोजित मातृशक्ति आर्य वीरांगना सम्मेलन में महिलाओं की भूमिका, संस्कार एवं समाज निर्माण पर विशेष विचार प्रस्तुत किए जाएंगे। वहीं 5 मई को युवा, राष्ट्र और धन्यवाद सत्र में युवाओं को राष्ट्रनिर्माण के लिए प्रेरित किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त प्रतिदिन आर्य वीर दल एवं आर्य वीरांगनाओं द्वारा शारीरिक व्यायाम और आत्मरक्षा प्रदर्शन भी आकर्षण का केंद्र रहेगा।



विशिष्ट अतिथि एवं विद्वानों की सहभागिता
इस भव्य आयोजन में अनेक संत, विद्वान, समाजसेवी एवं जनप्रतिनिधि भाग लेंगे, जिनमें प्रमुख हैं:
- महात्मा जितेंद्र भाटिया (MDH प्रतिनिधि)
- स्वामी परमानंद सरस्वती
- आचार्य विजय देव नैष्ठिक
- श्री धनीराम बेधक एवं श्री ओमवीर आर्य
- सिस्टर नीरज आर्य
- विभिन्न आर्य समाज एवं आर्य वीर दल के प्रतिनिधि
आयोजन का उद्देश्य
इस महासम्मेलन का मुख्य उद्देश्य है:
- वैदिक संस्कृति का प्रचार-प्रसार
- समाज से अंधविश्वास एवं पाखंड का उन्मूलन
- युवाओं में आत्मरक्षा एवं चरित्र निर्माण की भावना विकसित करना
- समाज को एकजुट कर राष्ट्रनिर्माण में योगदान देना
निष्कर्ष
आर्य समाज आर्यपुरा का यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज जागरण और वैदिक पुनर्जागरण का अभियान है। आयोजकों ने सभी समाजबंधुओं से आग्रह किया है कि वे अपने परिवार सहित इस आयोजन में सम्मिलित होकर इसे सफल बनाएं।
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