चार वेद और मनु का जिस जाति व देश को प्यार नहीं
चार वेद और मनु का
जिस जाति व देश को प्यार नहीं
उस जाति और देश के
समझो बचने के आसार नहीं।। टेक ।।
बहुत आदमी यह सोचें कि
युद्ध जीतेंगे बल वाले
बहुत कहें कि विजयी बनें
हाथी घोड़े दल बल वाले
बहुत कहें कि जीवित रहेंगे
बम तोप पिस्टल वाले
बहुत कहें कि जीवित रहेंगे
दुनिया में अक्ल वाले
पर याद रहे जिस देश के
घर-घर हवन की धुआंधार नहीं
उस जाति और देश के
समझो बचने के आसार नहीं।।1।।
बम भी थे और तोप भी थी और
बलशाली भी सारे थे
मगर ईश्वर वेदज्ञान बिन
सब जापानी हारे थे
हिटलर क्रीटल गौरिंग हेस
साइंस में धूम मचाये थे
उनका पता नहीं पाया जो
जमी का तख्त हिलाये थे
जिस देश के घर-घर सत्यार्थ
प्रकाश विधि संस्कार नहीं
उस जाति और देश के
समझो बचने के आसार नहीं।।2।।
महाभारत तक वेदों का
सत्कार यहां चहुं ओर रहा
व्यभिचारी दुर्व्यसनी गुंडा
कोई बेईमान न चोर रहा
न ही जुआरी नशेबाज न
कोई रिश्वतखोर रहा
रोटी कपड़ों के पीड़ितों का
किसी ठोर न शोर रहा
जिस देश के अन्दर दुखियारों की
सुनता कोई पुकार नहीं
उस जाति और देश के
समझो बचने के आसार नहीं।।3।।
शोभाराम वहां प्यार रहे
जहां पर कृतघ्नता न होगी
जिस जगह दान और तप
दोनों वहां पर निर्धनता न होगी
जहां बदमाशों को दंड नहीं
वहां कोई प्रसन्नता न होगी
जिस देश का राजा व्यापारी
आराम में जनता न होगी
जहां ज्ञानपूर्वक कर्म नहीं
और धर्मानुकूल व्यवहार नहीं
उस जाति और देश के
समझो बचने के आसार नहीं।।4।।










