चलते रहें जीवन के रथ सात्त्विक सुधार के
चलते रहें जीवन के रथ
सात्त्विक सुधार के
योगी तपस्वियों के द्वारा
सम्वृत विचार के
हे इन्द्र! मेरे रथ की तो रक्षा तुम्हीं करो
यह अवनति में उलझा है
परिरक्ष इसे करो
हे इन्द्र! मेरे रथ की तो रक्षा तुम्हीं करो
देखा है मेरे साथी तो आगे निकल गए
कोई धृति या धर्म त्याग
तपों से सम्भल गए
वैराग्य ना विवेक है मैं क्या करूं कहो?
यह अवनति में उलझा है
परिरक्ष इसे करो
हे इन्द्र! मेरे रथ की तो रक्षा तुम्हीं करो
कोई रथ है कर्मयोगी,
कर्मशूर ज्ञान से पूर
पीछे से भी वो आ के
सम्वेग से गये दूर
हे वज्रवाले इन्द्र!
मेरे रथ को विजयी करो
यह अवनति में उलझा है
परिरक्ष इसे करो
हे इन्द्र! मेरे रथ की तो रक्षा तुम्हीं करो
परिमन्द रथ मेरा हुआ
बल से करो वेगवान
तव इन्द्रबल की रक्षा से
कर दो इसे महान्
अवगति ना हो आत्मा की
इससे अश्वबल से भरो
यह अवनति में उलझा है
परिरक्ष इसे करो
हे इन्द्र! मेरे रथ की तो रक्षा तुम्हीं करो
कब तक पीछे पड़ा रहूं
आलस्यता के वश
पुरुषार्थ के सात्विक बलों से
रथ को करो दक्ष
अवनति के दलदल से
हटाने की दया करो
यह अवनति में उलझा है
परिरक्ष इसे करो
हे इन्द्र! मेरे रथ की तो रक्षा तुम्हीं करो










