चलो बजी आज रणभेरी मत करो जवानो देरी।
चलो बजी आज रणभेरी
मत करो जवानो देरी।
दुश्मन ने घाटियां घेरी
भयंकर जंग होगा-क्या बैठे।
इकले ने युद्ध दश दिन का,
लड़ा समझे जिकर है किनका।
कहे ‘भीष्म’ लड़ेंगे जिनका,
वज्रसम अंग होगा-क्या बैठे।
चल रही दनादन गोली,
खेल रहे खून को होली।
भारत वीरों की टोली,
शत्रु लख दंग होगा-क्या बैठे।
आगे महावीर चलेंगे,
बनकर वे पीर चलेंगे।
गाण्डीव के तौर चलेंगे,
प्रलय-सा डंग होगा-क्या बैठे।
बज रहा रणजीत नकारा,
संसार देख रहा सारा।
वीरो गुण गौरव तुम्हारा,
तुम्हारे संग होगा-क्या बैठे।
जो देश के हित मरते हैं,
वो भवसागर तरते हैं।
जीते हैं राज करते हैं,
जगत् में रंग होगा-क्या बैठे।
जो नहीं आपको माने,
उसके ना बाप को माने।
युद्ध में जो पाप को माने,
तो रंग में भंग होगा-क्या बैठे।










