चलने को प्रभु ने पग दिए, काम करने को हाथ।

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कृतज्ञता

चलने को प्रभु ने पग दिए,
काम करने को हाथ।
मनन करने को मन दिया है प्रभु!
जग के नाथ।।1।।

देखने को चक्षु दिए,
श्रवण को कान।
धन्यवाद निशदिन करूँ,
हे प्रभु! दयानिधान। ।2।।

जीवन के हित आपने,
दिया अन्न-जल दान।
सर्व सुखों के हेतु से,
दिए हमें धन धान।।3।।

रोग निवारण के लिए,
दीन्हीं औषध मूल।
नाना विध मेवे दिए,
और सुगंधित फूल।।4।।

सूर्य चाँद तारे दिए,
हमरे सुख के काज।
धन्यवाद है कोटिशः,
तुमको हे महाराज।।5।।

बुद्धि तेज और बल दिया,
निज रक्षा के काज।
धन्यवाद है कोटिशः,
तुमको हे महाराज।।7।।

धातु नाना भाँति के,
और रत्न अनमोल।
सुख हेतु पैदा किए,
बिन संख्या बिन तोल ।।6।।

सत्य आपका नाम है,
सत्य आपके काम।
तेरे सत्य स्वरूप को,
करता सदा प्रणाम।।8।।

सुख स्वरूप संकट हरण,
सुख स्वरूप तब धाम।
तुझ उपास्य जगदीश को,
वारम्बार प्रणाम।।9।।