चाहे भँवर हो चाहे पहाड़।

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चाहे भँवर हो चाहे पहाड़।

चाहे भँवर हो चाहे पहाड़।
चाहे नगर हो चाहे उजाड़।
बड़े सुख लाती है
तेरी दया प्रभु ।
दुःखों से बचाती है
तेरी दया प्रभु ।…

हो गमों की आँधी जब
सूझे न कोई सहारा।
उलझनों ने घेरा और
डरता हो राही बेचारा।
संकट की घड़ियों में
धीरज बँधाती है ।…

चल दिया मुसाफ़िर तेरे
दर का जो बन के दीवाना ।
मिल गया उसे तो तेरी
महती दया का ख़जाना ।
दूर करे सब काँटे
फूलों पे चलाती हैं।…

हर कदम पे ठोकर एक
पग भी न जाए बढ़ाया।
घिरे मुसीबतों में जिसने
हिम्मत से दिल न हटाया।
जंगल से मंजिल पे
पथिक पहुँचाती है।…