बुरा ना बोलो ना बोला ना
बुरा ना बोलो ना बोला ना,
बोलो ना अमृत में विष घोलो ना,
कोयल सबका जिया चुराये
कौआ किसी के मन ना भाये
करो वाणी को साफ,
गधे जैसा अलाप बोलो
हृदय को छोलो ना ।।१।।
मन्त्र पूछते कुछ नरनारी बशी करण
है वाणी हमारी मित्र बनते भी है,
और बिछडते भी है यदि
तोल तोल कर बोलो ना ॥२॥










