बूंद-बूंद पर तेरे जाऊँ

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बूंद-बूंद पर तेरे जाऊँ

बूंद-बूंद पर तेरे जाऊँ
बार-बार बलिहारी।

नदी सरोवर सागर बरसे,
लागी झरियां भारी।


मोरे आंगन क्यों न बरसे,
मैं क्या बात बिगारी।
तू बरसे मैं जी भर न्हाऊँ,
दोनों भुजा पसारी।


नैन मूंद कर नाचूं गाऊँ,
अपना आप बिसारी।
मैया बरस बरस रस बारी।।