बोल देशसे जवान तुझको कितना प्यार है।
बोल देशसे जवान
तुझको कितना प्यार है।
कितने पीड़ित अनाथ असहाई
को अब तक सहायता पहुँचाई।
आगे क्या विचार है। टेक।
वह बंगले में रंग ले,
देखो निर्दयी सेठ को।
वह कंगले बेढंग ले
पीटे भूखे पेट को ।।
अन्तर इतना भारी
मिटाना तेरी जिम्मेदारी।
जागते सोते निशदिन रोते,
दुखियों की पुकार है।।1।।
यही महीं जहां बही
कभी दूध की नालियाँ।
आज यहां जहां तहां
मदिरा की हैं प्यालियाँ ।।
शाक और अन्न फल छोड़के
खाये मांस और अंडे जैन्टल।
भेष और भाषा का यह
तमाशा देख सरे बाजार है।।2।।
शर्म नहीं कर्म नहीं
धर्म नहीं इन्सान क्या।
नहीं दया नहीं हया डूब गया
नौजवान क्या।।
तेरे आगे लुटती अस्मत,
महिलाओं की लानत।
शोभाराम खुद जाग जगादे
जो तू पहरेदार है।।3।










