शिक्षा
बिना अमल के ज्ञान व लैक्चर,
बातें हैं बातों का क्या।
कर्म नहीं तो ब्राह्मण क्षत्री,
जाति हैं जातों का क्या।।
सारा दिन निन्दा चुगली का,
कारोबार पसन्द किया।
शाम को माँस और मदिरा,
खाने-पीने का प्रबन्ध किया।
रात को नाच और लैक्चर सुन,
कल्चर और बुलन्द किया,
पर भजन बिना बेकार यह दिन,
और रातें हैं रातों का क्या ।।
बिना अमल के ज्ञान व लैक्चर……
कोई कहे ईश्वर ही नहीं है,
बेशक मौज-बहार करो,
कोई कहता है मैं हूँ ईश्वर,
मेरा सब दीदार करो।
कोई कहे यह झूठे हैं,
मुझ, सच्चे पर एतबार करो,
अपने-अपने दाँव पेंच और,
घाते हैं घातों का क्या।।
बिना अमल के ज्ञान व लैक्चर……
उसका रंग चढ़ेगा जग पर,
जो मेहंदी बन पिसता है,
सादगी, सदाचार है जिसमें,
वह इनसान फरिश्ता है।
अपना देश, धर्म और तीसरा,
ईश्वर सच्चा रिश्ता है,
‘नत्थासिंह’ बाकी सब फर्जी,
नाते हैं नातों का क्या।।
बिना अमल के ज्ञान व लैक्चर…….










