भूत भविष्यत् वर्तमान का
भूत भविष्यत् वर्तमान का
जो प्रभु है सबका स्वामी
गगन व्योम में – वही हृदय में
सबका है अन्तर्यामी
भूत भविष्यत् वर्तमान का
निर्विकार आनन्द कन्द है
जो कैवल्यरूप सुखधाम
उस महान् जगदीश्वर को है
अर्पित मेरा नम्र प्रणाम
भूत भविष्यत् वर्तमान का
कोटि कोटि योजन युग फैली
पृथिवी जिसके चरण समान
मध्य भाग में अन्तरिक्ष को
रखता है जो उदर समान
भूत भविष्यत् वर्तमान का
शीर्ष तुल्य जिसके हैं शोभित
ये नक्षत्र लोक अभिराम
उस महान् जगदीश्वर को है
अर्पित मेरा नम्र प्रणाम
भूत भविष्यत् वर्तमान का
जो प्रभु है सबका स्वामी










