भूल गये क्यूँ, उस दाता को जिसका ये जहान है।
तर्ज – ये कौन आया (क्यों मेरी रानी)
भूल गये क्यूँ, उस दाता को,
जिसका ये जहान है।
भू मण्डल में, दूसरा ना,
उसके कोई समान है।
जलचल थलचर नभचर में,
है वो रसना के स्वर में ढूंढ़ सको
तो ढूंढ़ लो उसको, अपने ही मन
के घर में रखना याद सचिन ‘सारंग’,
वो सर्वशक्तिमान है भूल गये क्यूँ……
चमकाये निश में तारें,
लगते हैं प्यारे-प्यारे जान सके
ना उसकी लीला, योगी ऋषि सभी
हारे निराकार निर्लेप निरंजन,
वो ही प्रभु महान है भूल गये क्यूँ……
अखण्ड सूर्य की ज्योति,
कैसे ये प्रचण्ड होती ले सकते ना
मोल इसे हम, देकर के हीरे
मोती लागू होता सदा जहाँ में,
उसका संविधान है भूल गये क्यूँ……
आयेगा आने वाला,
जायेगा जाने वाला भूखा प्यासा
कोई मरेगा, खायेगा खाने वाला
यथा योग्य फल देता है वो,
दाता दया निधान है भूल गये क्यूँ…..










