भोजन भवन बदन को वस्त्र होना बहुत जरूरी है।

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भोजन भवन बदन को वस्त्र होना बहुत जरूरी है।

भोजन भवन बदन को
वस्त्र होना बहुत जरूरी है।
परन्तु चरित्र निर्माण प्राथमिकता
बिन प्रगति अधूरी है।।

तन की बीमारी भी कुछ
साधन से कट जाती है।
धन को कंगाली भी कुछ
प्रयत्न से हट जाती है।।

जीवन में जो बुराई चाल
चलन से सट जाती है।
नहीं हटाई हटती कर
जीवन चौपट जाती है।।
आवश्यकता सुख समृद्धि
उपलब्धि की पूरी है परन्तु ।।1।

नहीं समस्या भोजन की
और नहीं समस्या है घर की।
नहीं समस्या सोना चांदी
हीरे लाल जवाहर की।।

नहीं समस्या बदन की
खातिर अमूल्य सुन्दर वस्तर की।
समस्या है घृणित व्यवहार की
ऊंचे नीचे अस्तर की।।
समाधान है समस्याओं का
नहीं कोई मजबूरी है, परन्तु…..।।2।

तन मन बुद्धि आत्मा का संयोग
पुरूष कहलाता है।
इसकी आवश्यकता समझों
सभी भेद खुल जाता हैं।।

तन को अर्थ और मनको
काम बुद्धि का धर्म से नाता है।।
खुल गया सारा भेद मोक्ष को
जीव आत्मा चाहता है।।
धर्म अर्थ और काम मोक्ष में
किचिंत भी नहीं दूरी है परन्तु……..।।3।।

धर्मानुकल आचरण करके
अर्थ व्यवस्था ठीक करो।
मर्यादा में काम को बांधों
पापाचरण से सदा डरो।।

जड़ में आग पत्तों पर पानी
क्यों विनाश की नींव धरो।
नियम धर्म ईश्वर को भुला
करके बिन आई मौत मरो ।।
शोभाराम तेरे गानों की
भारत में मशहूरी है।। परन्तु ……।।4।।

ईश्वराधन ही सर्व सुख का मूल है
किस पदार्थ को जान मनुज,
शुचि ज्ञानबान वन जाता है।
सत्य स्वरूप ईश जब उसका,
जीवन धन बन जाता है
सर्व प्रकाशक सर्व श्रेष्ठ,
अज्ञान तिमिर से दूर रहे
उसी पुरुष को परमेश्वर
द्युति देता भरपूर रहे

इष्ट देव प्रभु की उपासना
सभी मनुज नित्य किया करें
वही मोक्ष का दाता है,
कर भक्ति मधुर रस पिया करें
लोक और परलोक उभय
सुख पाने का है मार्ग यही करे
ईश की ही उपासना मोक्ष
धाम सुख कन्द वही