भीतर है सखा तेरा, जरा मन टिका के देख।

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भीतर है सखा तेरा, जरा मन टिका के देख।

भीतर है सखा तेरा,
जरा मन टिका के देख।
अन्तःकरण में ज्ञान की,
ज्योति जगा के देख ।।

हैं इन्द्रियों की शक्तियाँ,
बाहर की ओर जो।
बाहर की ओर से इन्हें,
भीतर को मोड़ दो।
कर द्वार सकल बन्द,
समाधि लगा के देख ।।
भीतर है सखा तेरा, जरा मन…..

शुद्ध आत्मा से उसकी,
तू रचना का ध्यान कर।
निश्चय ही झूम जाएगा,
महिमा का गान कर।
श्रद्धा की देवी रूठी हुई है,
मना के देख।।
भीतर है सखा तेरा, जरा मन……

साथी पवित्र देव हों,
बिगड़ी बने न क्यों।
जीवन यह तेरा भक्ति-रस में,
सने न क्यों।
आदर्श भक्तों जैसा तू,
जीवन बना के देख।।
भीतर है सखा तेरा, जरा मन……

मिलता है सखा तेरा,
इसी ही उपाय से।
मिलता नहीं कदापि,
वह अन्यत्र जाये से।
ईश्वर की वाणी वेद कहें,
आजमा के देख।।
भीतर है सखा तेरा, जरा मन…….