भीतर बाहर ब्रह्म भरा है
भीतर बाहर ब्रह्म भरा है,
ईशावास्यम् इदं सर्वम् ।
उसकी शक्ति जगत हरा है,
ईशावास्यम् इदं सर्वम् ।
एक ब्रह्म की कर लो पूजा।
दूजे सब में कुछ ना धरा है ।। १ ।।
व्यक्ति मृत्यु है नियत बन्धु रे।
जन समुदाय सदा रहा है।
जगत्यां जगत् जगत्यां जगत् ।
जन समुदाय सदा रहा है।। २ ।।
त्याग करो और भोग भोग लो (२)।
तेन त्यक्तेन भुंजीथा।
नियम स्थाई और खरा है ।। ३ ।।
ना कर धन यश मोह के लालच (२)।
मा गृधः (२)।
जग छोटा पर ब्रह्म बड़ा है।। ४ ।।










