भीगे भीगे नयन भक्ति रस से प्रसन्न

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भीगे भीगे नयन
भक्ति रस से प्रसन्न
प्यासे थे हम जनम जनम से
जागी प्रीत-अगन
भीगे भीगे नयन

भक्ति-रस कल्याण का
जागा ओ३म् के नाम का
ओ३म् के गुणगान् का
भाव पिता-सम्मान का
पुत्र प्रभु-प्रतिमान का
जीवन के उत्थान का


दृढ़ श्रद्धा विश्वास से
कर प्रेम-अभिवादन
भीगे भीगे नयन
भक्ति रस से प्रसन्न
प्यासे थे हम जनम जनम से
जागी प्रीत-अगन
भीगे भीगे नयन

पर दु:खकातरता निवारण
दयालुता सद्भाव प्रशम
जन-सौहार्द सजीलापन
पुण्य के प्रति आवर्तन
प्रभु-भजन केन्द्रित करण
वासनाओं का निवारण


वीरता धीरता सङ्ग विनम्रता
प्रभु को करते प्रसन्न
भीगे भीगे नयन
भक्ति रस से प्रसन्न
प्यासे थे हम जनम जनम से
जागी प्रीत-अगन
भीगे भीगे नयन

भक्ति-रस प्रभु-प्रेम में
मग्न होता जब हृदय
यही प्रकाश का है आशय
भक्तों को करते प्रभु प्रशस्त
अन्धकार हो जाते अस्त
पाप-दूरित हो जाते नष्ट


आओ प्रभु के सोमरस का
पान कर ले हम
भीगे भीगे नयन
भक्ति रस से प्रसन्न
प्यासे थे हम जनम जनम से
जागी प्रीत-अगन
भीगे भीगे नयन