भक्तों का होवे नमस्कार प्रभु तेरे चरणों में।

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भक्तों का नमस्कार

(तर्ज – मत्थे ते चमकन वाल मेरे बन्नड़े दे)

भक्तों का होवे नमस्कार प्रभु तेरे चरणों में।
झुकता है सारा संसार प्रभु तेरे चरणों में।
भक्तों का होवे नमस्कार……

तुम हो भण्डारी तो हम हैं भिखारी।
दीनों के नाथ सुनो विनती हमारी।
करते हैं मिलकर पुकार प्रभु तेरे चरणों में ……….

२. जो बन गया तेरे दर का सवाली।
आकर यहाँ कभी जाये न ख़ाली।
भरते हैं सब के भण्डार प्रभु तेरे चरणों में ………..

३. जिसने गुहार तेरे दर पर लगाई।
उसकी सदा तूने बिगड़ी बनाई।
कटते हैं संकट अपार प्रभु तेरे चरणों में ………

४. दुनियाँ में और कोई तुम सा न दाता।
माता पिता सखा बन्धु व भ्राता ।
मिलता है सबको ही प्यार प्रभु तेरे चरणों में ……..

५. भक्ति के भाव लिये जो दर पे आया।
उसको आनन्द मिला वरदान पाया।
ख़ुशियाँ मिली हैं बेशुमार। प्रभु तेरे चरणों में ……

६. श्रद्धा से भक्त करें गुणगान तेरा।
हो जाये दूर ‘पथिक’ मन का अन्धेरा ।
लागी है लग्न लगातार प्रभु तेरे चरणों में …….