भक्ति में मन परहित में तन जब तेरा हो जाएगा।

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भक्ति में मन परहित में तन जब तेरा हो जाएगा।

भक्ति में मन परहित में
तन जब तेरा हो जाएगा।
जब तुझे खुद के ही भीतर
परमात्मा मिल जाएगा।

मोक्ष साधन श्रेष्ठ जीवन,
तुझको वेदों से मिले।
‘गोविन्द’ इस पथ पर चले
तो फूल जीवन में खिलें।
वेदवाणी को न तजना,
वरना फिर पछताएगा……।

जिन्दगी का क्या भरोसा,
आज है कल को नहीं।
मौत सिर पर आ विराजे,
हो सके तब कुछ तो नहीं।
वक्त रहते चेत पगले,
वरना फिर पछताएगा…..।

साथ देने जो चले हैं,
भूल ही सब जायेंगे।
डालकर तुझको चिता में,
लौटकर घर आयेंगे।
पाला था जो तन यत्न से,
खाक में मिल जाएगा…।

छल-कपट और पाप से ही,
बस तेरा नाता रहा।
दीन-दुखियों-निर्बलों को,
दुःख ही दुःख देता रहा।
सोच ले तू जैसा बोता,
वैसा ही फल पाएगा….।