भक्ति में मन को लगाते रहेंगे

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भक्ति में मन को लगाते रहेंगे

जो भक्ति में मन को लगाते रहेंगें,
सफल अपना जीवन बनाते रहेंगें,

अन्धेरा मिटेगा तभी मन भवन का,
दिया ज्ञान का अगर जलाते रहेंगें…

नहीं बाँध सकते, उन्हें जग के बन्धन,
जो अज्ञानता को हटाते रहेंगें…..

मिटेगा यह झगड़ा, जन्म व मरण का,
जो मुक्ति का साधन जुटाते रहेंगें…

खिला ही रहेगा, कुसुम जिन्दगी का,
जो सत्संग की गंगा में नहाते रहेंगें…

जो नेकी के मोती चुने हंस बनकर,
तो देवों की दुनियाँ बसाते रहेंगें…