भजनवा ऐसा होय हमार मन का वचन का और कर्म का
भजनवा ऐसा होय हमार
मन का वचन का और कर्म का
सस्वर बोले तार गा
जीवन को गीत बनाकर
शंकरमय संगीत सजा कर
रसना से रस बरसा सरसा
मधुबन सी हो बहार।।
भद्र भावना भरके उर में
नित उंडेलो जगति भर में
सोत्र शांन्ति का उद्गम बन,
प्यासा है संसार भजनवा
ऐसा होय हमार।।
चिन्तन से चितचोर भगेगा
शुभ कर्मों की ओर लगेला
परमेश्वर का पकड़ सहारा
नैया हो उस पार भजनवा
ऐसा होय हमार।।
राग द्वेष छल बैर बिसारो
निर्मल निश्च्छल हो चित
हमारो यही साधना तुझे
सुरेन्द्र ले जाये प्रभु द्वार
भजनवा ऐसा होय हमार।।










