आजकल छेड़छाड़ शब्द बहुत फैलाया जा रहा है । लेकिन असली छेड़छाड़ के थोड़े से दर्शन कुछ पंक्तियों के माध्यम से भजन करवाने की कोशिश है।
छेड़छाड़ तो हुई थी मित्रों ,भारत के संस्कारो से ।
छेड़छाड़ मे मन्दिर टुटे, मुगलो की तलवारों से ।।
छेड़छाड़ के कारण कान्हा ,मथुरा मस्जिद मे रोता है ।
छेड़छाड़ के कारण श्री राम ,तिरपालो मे सोता है ।।
छेडछाड़ तो शिक्षा मे, लार्ड मैकाले लागू है ।
भारत के टुकड़े करने को , वामपंथ बेकाबू है ।।
इतिहास छेड़ा वेद छेड़े , छेड़ी ग्रन्थों की भाषा ।
खानपान को छेड़ करके, छेड़ी मानवता की परिभाषा ।।
देश प्रेम को छेड़छाड़ के , सेना तक का खाते हैं ।
छेड़छाड़ करने वाले ही ,इतना क्यों गुर्राते हैं ।।
खेल देश के छेड़ने वाले , हेलिकाप्टर तक को छेड़ गये ।
रेल कोयला चारा छेड़ा ,जगंलों तक के पेड़ गये ।।
छेड़छाड़ को सहन कर कर,भारत बंटा है टुकड़ों मे ।
छेड़छाड़ करके पनपते, जे एन यू के नुक्कड़ों मे ।।
छेड़छाड़ के संविधान से ,कश्मिरी बेघर होता है ।
वोटबैकं की छेड़कला से , यहां बंग्लादेशी सोता है ।।
भले गद्दारों की नजरों मे ,भारत बस जमीन का टुकड़ा है।
हमको तो आता नजर ये ,प्यारी माँ का मुखड़ा है ।।
कुछ जगे हैं ओर जगेगें , जिसने मन मे ठानी हो ।
देशद्रोही कभी सोचे भी ना , देश से छेड़खानी को ।।
देशद्रोही कभी सोचे भी ना , देश से छेड़खानी को …











