आर्य समाज भजनसभी लेख भज ले ओंकार रे मन मूर्ख अनारी। By Arya Samaj bhajan - June 15, 2025 0 25 FacebookTwitterPinterestWhatsApp भज ले ओंकार रे मन मूर्ख अनारी। भज ले ओंकार रे मन मूर्ख अनारी।चार दिनन के जीवनखातिर कैसा जाल पसारी।कोई न जावत संग तुम्हारे,मात-पिता, सुत-नारी।। पाप कपट से संचित कर धन,मूर्ख मौत बिसारी।ब्रह्मानन्द जन्म यह दुर्लभदेत वृथा किम डारी ।। Curent posts: जो करे ओ३म् से प्रीत वही नर मुक्ति पाते हैं न मैं धाम-धरती, न धन चाहता हूँ, कृपा का तेरी एक कण चाहता हूँ जगदीश ज्ञानदाता, सुखमूल शोकहारी भरा प्रेम से प्रभु का मन खिला सृष्टि रूप सुमन पीना दे छोड़, पीना दे ढूँढता हूँ आज अपनी आवाज़ में आवाज़ कोई। काटकर रोज जीवों को,खाते रहे, दिल लुभाते रहे हैं निर्भाग वें कितने जिनको प्रभु कण-कण में वास करता है ना कोई उसका मकां, ढूँढता है तू कहाँ।