भायां ओम् ओम् नित बोलो रे-बोलो रे।

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ओ३म् री महिमा

तर्ज – काका पाटी बरतनो लादे रे.

भायां ओम् ओम् नित बोलो रे-बोलो रे।
जप लो ओम् नाम ने, पायो नरतन चोलो ।। टेक ।।
चार वेद छः शास्त्रों में है, ओम् नाम री महिमा ।
उपनिषद रामायण, गीता कठै ओम री सीमा ।।१।। भायाँ….

ऋषि मुनि अर योगी सारा, ओम् नाम ही बोले ।
इणपद सूं ही ध्यान लगायर, ज्ञानरी गाँठा खोले ।।२।। भायाँ….

कुण हो और कठा सूं आया कठै है थानै जाणो ।
क्यूं थांने मेल्या है जगमें, अपने आप पिछाणौ ।।३।। भाय…

सोचो रजभर अरै मानवी, कतरो पुन्न कमायो ।
होना रा औसर ने भाया, क्यू थे जाण गुमायो ४ भायाँ….

जनम जनम रा शुभ कर्मों से, मनख जमारो पायो ।
बकरा मींडा वाढ वाढ नै, क्यू थाँ पाप कमाओ ।।५।। भायाँ….

“धर्म” करम ने मन में “घर” लो, होवे ला कल्याण ।
ओ३म् नाम नित भजलो भायाँ, पावो पद निरवाण ।।६।। भायाँ….

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