भगवान तुम्हारे मंदिर में, एक आस लगा कर आया हूँ।

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प्रार्थना

भगवान तुम्हारे मंदिर में, एक आस लगा कर आया हूँ।
अवगुणों को प्रभुजी दूर करो, सत्ज्ञान माँगने आया हूँ।।1।।

कुछ अश्रु के ये फूल चढ़ाकर,, तुम्हें मनाने आया हूँ।
तेरे नाम रत्न के कोष बढ़े, तेरी क्या माँगने आया हूँ। ।।2।।
भगवान तुम्हारे मन्दिर में ………

तेरे चरणों में प्रभु जी प्रेम बढ़े, मन पात्र में ज्ञानामृत भर दो।
प्रसाद रूप दो नयनों में, तेरी छवि को देखने आया हैं। ।।3।।
भगवान तुम्हारे मन्दिर में ………..

लक्ष्य है मानव जीवन का, निज इष्ट के दर्शन करने का
इस योग्य बना दो प्रभु मुझे, यह आग्रह लेकर आया हूँ।।4।।
भगवान तुम्हारे मन्दिर में ……….

‘केवल’ की विनय पुकार सुनो, गोरक्षा, का व्रत धारा है।
माता का करुणा चित्कार सुनो, गोकरुणानिधि में बतलाया है। ।।5।।
भगवान तुम्हारे मन्दिर में……….

भगवान तुम्हारे मंदिर में, यह आस लगा कर आया हूँ।
अवगुणों को प्रभु जी दूर करो, सत् ज्ञान माँगने आया हूँ। ।। 6 ।।