भगवन तुम कण-कण में रहते हो रहते हो
भगवन तुम कण-कण में
रहते हो रहते हो
तुम सारी सृष्टि को देते हो देते हो।।
मन्दिर में ना ढूंढू मुर्त्ति में न ढूंढू ।।
भगवान तुम कण-कण… ।।० ।।
अन्तरा – सुन्दर तेरी माया है,
पार तेरा न कोई पाया है,
भवसागर से पार हुआ,
शरण तेरी जो आया है।
दुःख ना कभी वो पाया है,
शरण तेरी जो आया है।
भगवान तुम कण-कण… ।।१ ।।
चान्द सितारें नदियां पर्वत,
तेरी याद दिलाती है।
ऋषि मुनि और योगी सारे,
तेरे ही गुण गाते हैं।
तूं सच्चा करतार है,
सबका पालनहार है ।।
भगवान तुम कण-कण… ।।२।।
द्वार तेरे जो ‘आता है,
मुँहमांगा फल पाता हैं।
जीवन में जो मोक्षु न पाया तो,
अन्त समय पछताता है।
जीवन सफल बनाना है,
भजन प्रभु का गाना है ।।
भगवन तुम कण-कण… ।।३।।










