भगवान् के घर देर या अन्धेर नहीं है।
भगवान् के घर देर या अन्धेर नहीं है।
उस ऊँची अदालत में हेरफेर नहीं है,
अन्धेर नहीं है।
सुनते हैं घड़ा पाप का,
भरता तो खूब जाए।
फिर अपने भार से ही,
पल भर में डूब जाए,
इन्साफ में लगती है जो,
वह देर नहीं है।
अन्धेर नहीं है,
भगवान के घर अन्धेर नहीं है।। (1)
देखो नियत समय पर,
सूरज निकलता ढलता,
अनुकूल वक्त लेकर,
दुनिया में पेड़ फलता,
बिन वक्त यहाँ शाम
और सबेर नहीं है,
अन्धेर नहीं है,
भगवान के घर अन्धेर नहीं है। (2)
बोलो जहाँ में किसका,
सिक्का सदा चला है
नामो निशान इक दिन,
दुनिया से मिट गया है,
कब रेत की दीवार,
बनी ढेर नहीं है।।
अन्धेर नहीं है,
भगवान के घर अन्धेर नहीं है।। (3)
ईश्वरीय न्याय एक दार्शनिक सिद्धान्त है। ईश्वर सत्य और न्याय का प्रतीक है और उसकी कर्मफल व्यवस्था एवं न्यायात्मक शक्ति अंततः जीतती ही है।










