भगवन् ! भले बुरे हम तेरे।
भगवन् ! भले बुरे हम तेरे।
द्वार तुम्हारे आये मांगते,
बन्धन काटो मेरे ।। भगवन्०
तू स्वामी है जगती तल का,
हम सेवक अज्ञानी,
तू है अजर अमर अविनाशी,
हम मूढमति अभिमानी,
भूल तुझे सब भटक रहे हैं,
शांति दान अब देरे ।। भगवन् ०
कोटि कोटि पापों से पूरित,
मेरी जीवन गाथा,
अंधकार में भटक रही है,
जीवन तंत्री त्राता,
ज्योति दिखा हे नाथ उबारो,
मांग रहे नित टेरे।। भगवन् ०
ज्ञान दीप को भूल बावरे,
माया पीछे धाये,
सत्य वस्तु को छोड़ भला क्या,
छाया कोई पाये,
राह दिखा ओ! दीन
दयालु द्वार पड़े हैं तेरे ।। भगवन्०
आज हमारी नौका डगमग,
डोल रही है स्वामी,
जगत भंवर में गोते खाता,
व्यथित हुआ है प्राणी,
एक तुम्हारी आशा अब है,
हमको सांझ सबेरे ।। भगवन् ०
जीवन सफल बनाओ,
दो आशीष हमें तुम,
तुझमें खो दें अपनेपन को,
और कहें केवल तुम,
जगत् उद्धारक परमपिता हो,
एक सत्य प्रिय मेरे ।। भगवन् ०










