भगवान् भजन करने को जो प्रातः समय उठ जाता है

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भगवान् भजन करने को जो प्रातः समय उठ जाता है

भगवान् भजन करने को जो
प्रातः समय उठ जाता है
आनन्द की वर्षा होती है
जीवन में वह सुख पाता है

ये सौदा नहीं है घाटे का
नहीं कीना है तो कर देखो
इस सौदे को कर ने वाला
घाटा न कदापि खाता है

यह सागर है – इस सागर से
सन्तों ने मोती पाये हैं
जो इस सागर में कूदेगा/डूबेगा
डुबकी से मोती पाता है

सन्सार को जिसने जान लिया
परमेश्वर को पहचान लिया
यह निश्चय मन में ठान लिया
क्या इस दुनिया का नाता है

भगवान् भजन करने को जो
प्रातः समय उठ जाता है
आनन्द की वर्षा होती है
दुनिया में वह सुख पाता है
आनन्द की वर्षा होती है
जीवन में वह सुख पाता है