भगवन् बड़े कमाल की

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भगवन् बड़े कमाल की

भगवन् बड़े कमाल की,
रचना है आपकी
वर्णन करी न जाये जो,
महिमा है आपकी

कहीं पे रेगिस्तान बने और
कहीं बड़ी हरियाली
कहीं झाड़ियाँ काँटों वाली
कहीं फूल की डाली
फूलों में जो बस रही वो,
खुशबू है आपकी
भगवन् बड़े कमाल की,
रचना है आपकी

कभी तपन सूरज की है कभी,
मस्त पवन लहराती
कभी चाँदनी नहलाती –
कभी काली रात डराती
आज ओढ़ी है चुनरिया –
अम्बर ने तारों की
भगवन् बड़े कमाल की,
रचना है आपकी

कल कल करती नदी बहे प्रभु,
सागर में मिल जाती
सागर की लहरें भी भगवन्
तेरा राग सुनाती
लहराती इठलाती गाती
महिमा वो आपकी
भगवन् बड़े कमाल की,
रचना है आपकी

ऊँचे ऊँचे पर्वत है कहीं
झर झर झरने बहते
कहीं चहकते पंछी भगवन्
तुमको वन्दन करते
भावविभोर “सरोज” देखकर
महिमा ये आपकी
भगवन् बड़े कमाल की,
रचना है आपकी
वर्णन करी न जाये जो,
महिमा है आपकी
भगवन् बड़े कमाल की,
रचना है आपकी