भगवान आर्य जाति को प्रमाद ना हो जाये

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भगवान आर्य जाति को प्रमाद ना हो जाये

भगवान आर्य जाति को
प्रमाद ना हो जाये,
यह ऋषियों की फुलवारी
बर्बाद ना हो जाये।

आदि सृष्टि से यह जीवन
बन्धा है जिसमें,
लुप्त धार्मिक वह
मर्याद ना हो जायें।।1।।

जननी जन्म भूमि का
प्यार छोड़ करके,
सन्देह किसी गैर की
औलाद ना हो जायें।।2।।

स्वस्थ्य परम्परायें
संस्कृति सभ्यता के,
विरुद्ध आचरण का
उन्माद ना हो जाये।।3।।

ब्रह्मयज्ञादि यह नित्य कर्म प्रेमी,
डर है खाना पूर्ति
अपवाद ना हो जाये। ।4।