भगवान आपसे विनय यही
भगवान आपसे विनय यही,
हमें दुखों से छुटकारा दो।
औरों का कुछ भी नहीं चाहते,
जो कुछ है शेष हमारा दो।।
इस आवागमन के चक्कर में,
हम मारे मारे फिरते हैं।
कभी जन्मते हैं कभी मरते हैं,
कभी डूबते हैं कभी तिरते हैं।।
इस कर्म श्रृंखला सागर में,
डूबे हैं तनिक उभारा दो।।1।।
हम भूले भटके राही हैं,
हमें सन्मार्ग का ज्ञान नहीं।
क्या करना क्या नहीं करना,
हमको यह भी पहचान नहीं।।
अज्ञान रूपी अन्धियारे में,
हमें ज्ञान सुखद उजियारा दो।।2।।
यह तो हम जानते हैं भगवन्
हम अच्छा बुरा जो कर्म करें।
वैसा ही फल तुम दो हमको,
फिर कर्मों के फल से क्यों डरें ।।
शुभ कर्म करण की शक्ति दो,
गिरतों को हमें सहारा दो।। 3 ।।
हम नर हैं तुम नारायण हो,
हम भंवर में हैं तुम पार करो।
है “शोभाराम” की विनती यही,
स्वीकार ऐ सर्वाधार करो।।
इस पुण्य भूमि भारत माँ को,
कोई धार्मिक रहबर प्यारा दो।।4।










