बेजुबाँ, जीवों को, ना सताना कभी।

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बेजुबाँ, जीवों को, ना सताना कभी।

तर्ज -ये कली जब तलक……

बेजुबाँ, जीवों को, ना सताना कभी।
इनसे प्यार, इनसे प्यार,
इनसे प्यार करो, इनसे प्यार करो ।।
बेजुबाँ जीवों को……

जीभ का स्वाद इनसे,
संवारा ना कर इन पशु पक्षियों को तू,
मारा ना कर इनका दिल,
ना ‘सचिन’, तू दुःखाना कभी
इनसे प्यार, इनसे प्यार,
इनसे प्यार करो इनसे……..

ये बेचारे तो बिल्कुल,
खामोश हैं ये तो सारे इनका खूँ,
ओ के सारे, निर्दोष हैं बशर
, ना बहाना कभी इनसे प्यार,
इनसे प्यार, इनसे प्यार करो इनसे……

काटकर जो इन्हें तू,
अरे खायेगा ज़िन्दगी में तू नादान,
पछतायेगा जोश रे, तू इन्हें,
ना दिखाना कभी इनसे प्यार,
इनसे प्यार, इनसे प्यार करो इनसे…..