बेला अमृत गया आलसी सो रहा बन अभागा
बेला अमृत गया आलसी
सो रहा बन अभागा
साथी सारे जगे तू न जागा।
सोया कब तक रहेगा तू भाई,
उठ तू करले धर्म की कमाई।
कर्म शुभ अब बना,
नित्य सत्संग में जान कर नागा-
साथी सारे जगेतून जागा
झोलियाँ भर रहे हैं भाग्य वाले,
लाखों पतितों ने जीवन संभाले।
रंक राजा बने भक्तिरस में सने,
कष्ट भागा साथी सारे
जगे तू न जागा।
कर्म उत्तम थे नरतन जो पाया,
आलसी बन के हीरा लुटाया।
हो गई उल्टी मति, करके
अपनी क्षति, रोने लागा-
साथी सारे जगे तू न जागा।
धर्म वेदों का देखा न भाला,
बेला अमृत गया न संभाला।
सौदा घाटे का कर,
हाथ माथे पे धर, रोने लागा
साथी सारे जगे तू न जागा।
देख तूने न अब भी विचारा,
सर से ऋषियों का ऋण ना उतारा।
हंस का रूप था, गदा पानी पिया,
बनके कागा-साथी सारे जगे तू न जागा।
प्यारे कब तक भटकता रहेगा,
गर्भ में आ लटकता रहेगा।
सोच आयेगी कब जोड ईश्वर से
अब अपना तागा साथी सारे
जगेतून जागा।










