बावरे मनवा क्यूँ ना प्रभु की याद आती है

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बावरे मनवा, क्यूँ ना प्रभु की याद आती है
प्रभु अपना साथी है
ममता की लड़ी तो टूट जाती है
प्रभु अपना साथी है

भाई-बन्धु, कुटुम्ब के झमेले
चार दिन के समझ ले ये मेले
अकेले ही छोड़ें सूरत, जिनकी मन भाति है
प्रभु अपना साथी है
बावरे मनवा, क्यूँ ना प्रभु की याद आती है
प्रभु अपना साथी है
ममता की लड़ी तो टूट जाती है
प्रभु अपना साथी है

जाने वाले तो – जग से हैं जाते
ये तो माना वो लौट के भी आते
पाते नहीं, अपनों को मिल यादें तड़पाती हैं
प्रभु अपना साथी है
बावरे मनवा, क्यूँ ना प्रभु की याद आती है
प्रभु अपना साथी है
ममता की लड़ी तो टूट जाती है
प्रभु अपना साथी है

कर्म कुछ नेकियों के कमा जा
जाने पर याद तेरी जो आ जा
राजा हो या रङ्क, सभी को मौत आती है
प्रभु अपना साथी है
बावरे मनवा, क्यूँ ना प्रभु की याद आती है
प्रभु अपना साथी है
ममता की लड़ी तो टूट जाती है
प्रभु अपना साथी है

आने वाला समय न टलेगा
कर्म ही साथ तेरे चलेगा
चलेगा जब तक दीप में “कर्मठ” तेल और बाती है
प्रभु अपना साथी है
बावरे मनवा, क्यूँ ना प्रभु की याद आती है
प्रभु अपना साथी है
ममता की लड़ी तो टूट जाती है
प्रभु अपना साथी है

रचनाकार :- श्री कर्मठ जी