प्रभु की बातें प्रभु ही जाने
(तर्ज- तुम्हीं हो माता पिता तुम्हीं हो…)
बता गये हैं यह लोग स्याने
प्रभु की बातें प्रभु ही जाने ।
न हम ही जाने न आप जाने
प्रभु की बातें प्रभु ही जाने ।
बता गये हैं यह लोग स्याने………..
१. यह विश्व परमाणुओं से रच कर ।
छुपा है सब की नज़र से बच कर ।
मिला कभी न किसी ठिकाने।
प्रभु की बातें प्रभु ही…..
२. जनम जनम की प्रभात फेरी।
कभी सजाई कभी बिखेरी।
जगन्नियन्ता परमपिता ने।
प्रभु की बातें प्रभु ही…..
३. सुबह सवेरे गगन पे आना।
व शाम सूरज का डूब जाना ।
कला दिखाई इसी बहाने।
प्रभु की बातें प्रभु ही…..
४. जो आत्मायें यहाँ पे आयें।
वे मिल मिला कर के लौट जायें।
शरीर तज कर फटे पुराने।
प्रभु की बातें प्रभु ही…..
वही विधाता है न्यायकारी।
प्रजा उसी के अधीन सारी ।
नज़र से गुज़रे कई ज़माने।
प्रभु की बातें प्रभु ही…..
६. ‘पथिक’ न थकते न हारते हैं।
दशों दिशायें निहारते हैं।
अजब नज़ारे सदा सुहाने।
प्रभु की बातें प्रभु ही…..










