बशर को जबकि बचपन की पुरानी याद आती है।
बशर को जबकि बचपन
की पुरानी याद आती है।
पिता का प्यार मी की
मेहरबानी याद आती है।।
वो बेपरवाह जीवन में,
बहारों की खिली कलियां।
बो संग हम जोलियों की
टोलियों से नाचती गलियां।
उमर के पहले हिस्से की
सुहानी याद आती है।।१।।
ये मूंछ फटते ही फूट आई
सब तमन्नायें।
फर्ज का बोझ जुम्मेदारियां
टेड़ी समस्यायें।
बेफिक्री से बीती यो
पुरानी याद आती है।।२।।
जयां पंछी को घर पकड़ा
बुढ़ापे के शिकारी ने।
पिंजरे ही को पिंजर कर दिया
दुःख औ बीमारी ने।
बूढे तोते को अपनी
जवानी याद आती है। ।३।।
ये जीवन खत्म करके
जब गया यमराज के द्वारे।
अमलनामा सुना तो
नत्थासिंह फिर शर्म के मारे।
नर्क जाते समय बन्दे को
नानी याद आती है।।४।।
जिनका हृदय द्वेष या
वैर की आग में
जलता है,
उन्हें रात में नींद नहीं आती।










