बसर संसार में आकर प्रभु को भूल जाता है।

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बसर संसार में आकर
प्रभु को भूल जाता है।
माया ममता में मन लाकर
प्रभु को भूल जाता है।

ये चादर ओढ़कर जब तूं
पिता के पास जाएगा।
हजारों दाग हैं इस पर
शर्म से सिर झुकाएगा।
क्यों तू ‘बेमोल’ गा-गाकर
प्रभु को भूल जाता है….।

रहा ना याद वो दिन
जब अन्धेरा ही अन्धेरा था।
तू जब उल्टा लटकता था
नरक के बीच डेरा था।
जरा-सी रोशनी पाकर
प्रभु को भूल जाता है….।

भला क्या है बुरा क्या है
तनिक भी जान पाया ना।
दिया सब कुछ तुम्हें
जिसने उसे पहचान पाया ना।
मगर क्यों तू कुछ पाकर
प्रभु को भूल जाता है….।

धरा पर हर तरफ अमृत
भरी रसधार बहती है।
ये गंगा ज्ञान की लेकर
निराला प्यार बहती है।
अमर यह आप विष खाकर
प्रभु को भूल जाता है….।