बर्बाद कर रहा क्यों (तर्ज-मुझे इश्क है तुम्हीं…)
बर्बाद कर रहा क्यों,
ऐ नौजवां जवानी।
जिसे पीकर झूमता है,
तेरे नाश की निशानी….।
घर मुफलिशों का देश,
बिन रोशनी अंधेरा।
उसे देख जिसको लाया
कभी बांधकर के सेहरा ॥
ढकने को लाज तन की है
कपड़े की हैरानी…..।
इस हाल में तू फिरता,
गलियों में उठता गिरता।
वारन्ट मौत का है,
स्मैक क्या हिरोइन मरने से
क्यों ना डरता।
गाँजे से कर गिलानी….।
कितना नशे का आदी
सारी उम्र गंवादी।
खिलने से पहले तूने,
दिल की कली बुझादी।
कुछ भी ना देख पाया,
अपना तू लाभ-हानि….।










