बानो आर्य खुद और जहाँ को बना दो।
बानो आर्य खुद और जहाँ को बना दो।
जो कहते हो दुनियां को करके दिखा दो।।
प्रभु एक है वेद है उसकी वाणी।
ये पैगाम स्वामी का घर-घर सुना दो।।१।।
न ऋषियों की तहजीब मिट जाये वीरो।
मिटाये जो इसको उन्हें तुम मिटा दो।।२।।
हंसाओ न दुनियां को लड़-लड़ के बाहम।
समाजों में उल्फत की गंगा बहा दो।।३।।
जहालत की दीवारें अब तक खड़ी हैं।
उठो और इन्हें देखो जड़ से हिला दो।।४।।
भटकते बहुत पिशना लब फिर हरे हैं।
मुसाफिर’ उन्हें जामे बहदत पिला दो।।५।।










