बहुत याद करते है शहीदों को हम।

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शहीदों की याद (स्वर- बहुत प्यार करते है)

बहुत याद करते
है शहीदों को हम।
जवानी के जिन्दा लहू की कसम ।।

यही आरजू और तमन्ना थी
मन में खाके वतन
कोई रख दे कफन में
फांसी का कोई ना माना था गम ।।
बहुत याद ……

जवानी का जलवा
किसी ने दिया था
गुलामी ने जिनको
लानत बताया
एसेम्बली में जाकर के
फेंका था बम ।।
बहुत याद……

फांसी के तख्ते पर जा करके
झूले समझ करके दुल्हन
फंदे फांसी को चूमे
वजन बढ़ गया था निराली रसम ।।
बहुत याद…….

अनेको अमर हुए जेलों
सड़के मुस्काये कितने फांसी पै चढ़के
मरना वतन पै है अपना धर्म ।।
बहुत याद…..

आर्यवीरों राष्ट्र की
मशाल को संभाल लो
एक दीप बुझ चले
दूसरे के बार लो
यह दयानंद की कसम,
यह श्रद्धानन्द की कसम
वन्दनीय मातृभूमि बोल विश्वमातरम् ।