बहनो गाओ हे मंगलाचार
बहनो गाओ हे मंगलाचार,
ससुर के द्वार,
चला है हमारा ब्रह्मचारी।।टेक ।।
पच्चीस वर्ष तपस्वी रहकर,
वेद वेदांग पढ़े दुःख सहकर,
ब्रह्मचारी व्रत धार चला है,
हमारा ब्रह्मचारी ।।1।।
माता-पिता का आज्ञाकारी,
तप करके आया तप धारी,
करने विवाह संस्कार चला है,
हमारा ब्रह्मचारी।।2।।
साथ बन के चले बराती,
बाप ड्राइवर नाती भाती,
होकर खुशी अपार चला है,
हमारा ब्रह्मचारी ।।3।।
वस्त्र रंगे बसन्ती रंग में,
आनंद होकर मलकर अंग में,
बटना खुशबूदार चला है,
हमारा ब्रह्मचारी।।4।।
शोभाराम प्रेमी भी संग में,
आज चला है भर के उमंग में,
करने को प्रचार चला है,
हमारा ब्रह्मचारी ।।5।।










