बड़ी श्रद्धा से तू प्यारे !!
बड़ी श्रद्धा से तू प्यारे !!
प्रभु के गीत गाया कर
उसी के नाम की मस्ती
सदा दिल में बसाया कर
बड़ी श्रद्धा से तू प्यारे !!
भला इन्सान ही वह क्या
रहे मायूस जो हरदम
तू अपनी आत्मा की
शक्तियों को आजमाया कर
बड़ी श्रद्धा से तू प्यारे !!
भला कैसे जो औरों के
बनाने से ये बन जाएँ
तू अपने नेक कर्मों से
सोई किस्मत जगाया कर
बड़ी श्रद्धा से तू प्यारे !!
भलाई कर भला चाहे
बुराई से बुरा होगा
तू अपनी भावनाओं को
परम पावन बनाया कर
बड़ी श्रद्धा से तू प्यारे !!
बड़ा सौभाग्य है तेरा
जो मानव तन तुझे पाया
इसे भगवान् का मन्दिर
समझकर तू सजाया कर
बड़ी श्रद्धा से तू प्यारे !!
न कोई रङ्ग है ना रूप
अरे भगवान् का तेरे
तू अपनी आत्मा में ज्ञान का
दीपक जलाया कर
बड़ी श्रद्धा से तू प्यारे !!
अरे क्यों दूर समझे हैं
प्रभु के धाम की नगरी
वह तेरे पास ही अन्दर
जरा गर्दन झुकाया कर
बड़ी श्रद्धा से तू प्यारे !!
प्रभु के गीत गाया कर
उसी के नाम की मस्ती
सदा दिल में बसाया कर










