बढ़े जा ऽ बढ़े जा ऽऽ बढ़े जा ।

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बढ़े जा ऽ बढ़े जा ऽऽ बढ़े जा ।

बढ़े जा ऽ बढ़े जा ऽऽ बढ़े जा ।
लोक हित में आगे,
सर्व हित में आगे-आगे।
विश्व हित में आगे ।। टेक ।।

यहां हर कोई है सगा,
पवित्र प्रेम है पगा।
सत ही अन्तर जरा सा,
अभेद है भीतरी गहरा ।। १ ।।

सुख बांटे से दुःख हो कम,
पर दुःख नैना होएं नम।
भलाई कर चलें हरदम,
कि हर होएं हमें प्यारा ।। २ ।।