अय ऋषि दयानन्द तेरी
अय ऋषि दयानन्द तेरी
युग-युग तक अमर कहानी।
हम भूल नहीं सकते हैं,
की तूने जो कुर्बानी ॥ टेक ॥
तू धर्म का था दीवाना,
सच्चाई का परवाना।
तू झुका सत्य के आगे,
तेरे आगे झुका जमाना।
सुन तेरी अद्भुत वाणी दुनिया
होगई दीवानी हम भूल नहीं….।
लाखों भूले भटकों को
तूने मार्ग दिखलाया।
जो श्रद्धा करके आया
उसे श्रद्धानन्द बनाया।
सच तो यह है मुर्दों को बख्सी
तूने जिन्दगानी-हम भूल नहीं….।
बन सच्चा सेवक तूने
की देश धर्म की सेवा।
लाखों तेरे अनुयायी
सबको यह बाँटी मेवा।
मिलके जो आज हम बैठे
सब तेरी मेहरबानी हम भूल नहीं…।
4.कई तुझे मारने आए
लेकिन मार न पाए।
भला उसको कौन मिटाए
जिसको भगवान् बचाए।
की कदर कदरदानों ने बेकदरों
ने कदर न जानी-हम भूल नहीं….।
थी धन्य तुम्हारी माता
जिसने था तुझको जाया।
वो धन्य गुरु ‘विरजानन्द’
जिससे ज्ञान या पाया।
उस लासानी योगी ने किया
तुझको भी लासानी-हम भूल नहीं….।










