तर जायेंगे, तर जायेंगे
तर जायेंगे, तर जायेंगे तर जायेंगे, तर जायेंगे,ओ३म् नाम जपनवाले तर जायेंगे।रह जायेंगे, रह जायेंगे,मोह माया के लोभी रह जायेंगे।आया […]
तर जायेंगे, तर जायेंगे तर जायेंगे, तर जायेंगे,ओ३म् नाम जपनवाले तर जायेंगे।रह जायेंगे, रह जायेंगे,मोह माया के लोभी रह जायेंगे।आया […]
जगदीश ज्ञान-दाता, सुख-मूल, शाकाहारी। जगदीश ज्ञान-दाता,सुख-मूल, शाकाहारी।भगवन! तुम्हीं सदा हो,निष्पक्ष न्यायकारी।। सब काल सर्वज्ञाता,सविता पिता विधाता।सब में रमे हुए हो
अब सौंप दिया इस जीवन का अब सौंप दिया इस जीवन का,सब भार तुम्हारे हाथों में।है जीत तुम्हारे हाथों में,है
इस पार भी वो है (तर्ज- मेरा प्यार भी तू है) इस पार भी वो है,उस पार भी वो है।वही
हो भज मन प्यारे (तर्ज- हो बाबुल प्यारे..) हो भज मन प्यारे…ओ३म् ही नाम अति उत्तम,दुःखों में वही बने हमदमजाप
मुझमें ओ३म् तुझ में ओ३म् सब में ओ३म् समाया। मुझमें ओ३म् तुझ मेंओ३म् सब में ओ३म् समाया।सब से करलो प्रीत
ईश्वर से करते जाना प्यार ओ नादान मुसाफिर। ईश्वर से करते जानाप्यार ओ नादान मुसाफिर।जीवन की करले नैया पारओ नादान
बातों ही बातों में बीती रे उमरिया। बातों ही बातों मेंबीती रे उमरिया।तुझे होश न आया योंही वक्त गंवाया।।किया कभी
बुराईयों को कभी जीवन में अपनाना नहीं चाहिए। बुराईयों को कभी जीवनमें अपनाना नहीं चाहिए।यह मीठा जहर होता हैइसे खाना
चंचल मन नित ओ३म् जपाकर चंचल मन नित ओ३म् जपाकर,ओ३म् जपाकर ओ३म् ।पल-पल, छिन-छिन,घड़ी घड़ी निशिदिन,ओ३म् जपाकर ओ३म् ।। प्रातः
इंसान इंसान नहीं रहा (तर्ज- तेरी प्यारी-प्यारी सूरत..) इंसान इंसान नहीं रहाबन गया है पशु समान।मेरे भगवान् मानव-मानवताखो बैठा न
ओ३म् अनेक बार बोल प्रेम के प्रयोगी। ओ३म् अनेक बार बोल प्रेम के प्रयोगी।है यही अनादि नाद,निर्विकल्प निर्विवाद ।भूलते न
निर्बल के प्राण पुकार रहे निर्बल के प्राण पुकार रहे,जगदीश हरे जगदीश हरे।श्वासों के स्वर झंकार रहे,जगदीश हरे जगदीश हरे
उठके सबेरे जेहडे प्रभु गुण गानगे। उठके सबेरे जेहडे प्रभु गुण गानगे।मंगिया मुरांदा भगवान् कोलों पानगे।।उठके… प्रभु दे द्वारे उत्ते
प्रभु के भजन बिन जीवन गंवाया रे। (तर्ज – चुप-चुप खड़े हो) प्रभु के भजन बिनजीवन गंवाया रे।कुछ न कमाया