आशानन्द जब अन्त समय हो

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भला करो भगवान् सबका भला करो।

आशानन्द जब अन्त समय हो,
रोम रोम में ओम् की लय हो।
ओ३म् से छूटें प्राण-सबका
भला करो……….

हम सब आए शरण तिहारी,
भगवन् सुनलो विनय हमारी।
दो बुद्धि का दान-सबका
भला करो…….

अंग-अंग सब रोग रहित हों,
मानव का मानव से हित हो।
करो स्वास्थ्य प्रदान सबका
भला करो…..

श्रद्धा सीखें श्रद्धानन्द से,
दया को धारें दयानन्द से।
दिया घातक को दान-सबका
भला करो…….

बुरे कर्म के पास न जावें,
रल मिल के तेरे गुण गावें।
यही विजय का गान-सबका
भला करो…….

शुद्ध सरल सबका जीवन हो,
तेरी भक्ति में तन-मन हो।
मानव बने महान् सबका
भला करो……..

वैदिक धर्म के व्रत को पालें,
राम कृष्ण की संस्कृति धारें।
बनें वीर हनुमान सबका
भला करो………

तुम हो सारे जग के पालक,
मात-पिता तुम, हम हैं बालक !
मागें ये वरदान सबका
भला करो……..

सूरज पृथ्वी चाँद सितारे,
चमकें सारे न्यारे-न्यारे।
करें तेरा गुणगान सबका
भला करो………

गर्भ में कैसे गात बनाओ-
गात बनाकर जोत जगाओ।
है बुद्धि हैरान-सबका
भला करो……..

उसी बीज से फूल उगाये,
काँटे भी उस बीज में पाये।
कह ना सके जुबान सबका
भला करो…….

शुद्ध विचार कुटी में भर दो,
बुरी भावना दूर ही कर दो।
हो सबका कल्याण-सबका
भला करो………….