आर्यों की सन्तान डरना क्या जानें।
आर्यों की सन्तान
डरना क्या जानें।
जीव आत्मा अमर
ये मरना क्या जानें।।
नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि,
पढ़लो गीता की वाणी।
कृष्ण की साफ जुबानी,
फिर मोह शोक नादानी
करना क्या जानें।।
परनारी मात समाना,
और परधन मिट्टी जाना।
इस सिद्धान्त को
जाना तो फिर माल,
पुराना हरना क्या जाने।।
जीवन पथ में बांधायें,
चाहें कितनी भी आ जायें।
पर किञ्चित न घबरायें,
कभी वीर बहादुर आहें
भरना क्या जानें।।
जिन्होंने हमसे बात बिगाड़ी,
हम आ गये तभी अगाड़ी।
बनें अरि के लिए कुल्हाड़ी,
तारा चन्द्र कदम पिछाड़ी
धरना क्या जानें। आर्यों की सन्तान…










